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Wednesday, 4 March 2020

বর্ধমান ষ্টেশনের একাংশ ভেঙে পড়ায় দায়ী ঠিকাদারই, জরিমানা ৮ লক্ষ টাকা


ফোকাস বেঙ্গল ডেস্ক,পূর্ব বর্ধমান: বুধবার বর্ধমান ষ্টেশন পরিদর্শন করে গেলেন পূর্ব রেলের জেনারেল ম্যানেজার সুনীত শর্মা। তাঁর সঙ্গে ছিলেন ডিআরএম সহ রেল দপ্তরের পদস্থ কর্তারাও। এদিন বর্ধমান ষ্টেশনের বিভিন্ন দিক ঘুরে দেখেন সুনীত শর্মা। কথা বলেন সাধারণ যাত্রীদের সঙ্গেও। যাত্রীদের সুবিধা অসুবিধা সম্পর্কে জানতেও চান। একইসঙ্গে এদিন রেলকমীদের রানিং রুম, তাঁদের বাসস্থান সহ প্রায় ৫০ বছরের লোকো ডিজেল শেড ঘুরে দেখেন।

পরে সুনীত শর্মা জানিয়েছেন, যাত্রীদের স্বাচ্ছন্দ্যই তাঁদের কাছে অগ্রাধিকার। সেই লক্ষ্য নিয়েই তাঁরা এগিয়ে চলেছেন। এদিন তিনি জানিয়েছেন, একটা সময় রেল চলত কয়লায়। পরে ডিজেলে চালিত হয়। বর্তমানে ইলেকট্রিকের ব্যবহার বেড়েছে। তাই আস্তে আস্তে ডিজেল চালিত ইঞ্জিন কমে আসছে। আর এই কারণেই বর্ধমান ষ্টেশনের পাশে থাকা প্রায় ৫০ বছরের এই ডিজেল সেডেও আধুনিকতার ছোঁয়া লাগছে। ইতিমধ্যেই এখানে ইলেকট্রিকের কাজ শুরু হয়েছে। আস্তে আস্তে কমিয়ে দেওয়া হবে ডিজেলের ব্যবহার।

অন্যদিকে, এদিন সুনীত শর্মা জানিয়েছেন, রেলের যে অংশ ভেঙে পড়েছিল তা ২ মাসের মধ্যেই পুনর্নিমাণ করা গেছে। বাকি অংশের ভবনটির আপাতত কোনো সমস্যা নেই বলেই এদিন জানিয়ে যান তিনি। একইসঙ্গে তিনি জানিয়েছেন, ডানকুনি থেকে যে রেলওয়ে ফ্রেট করিডর তৈরী হচ্ছে তার ফলে বর্ধমান ষ্টেশনের অনেকটাই রদবদল হবে। এব্যাপারে পরিকল্পনা গ্রহণ করা হয়েছে।

অন্যদিকে, বর্ধমান ষ্টেশনের একাংশ ভেঙে পড়ার ঘটনায় তদন্ত রিপোর্টে কি পাওয়া গেল সেই প্রশ্নের উত্তরে পূর্ব রেলের ডিআরএম ইশাক খান জানিয়েছেন, তদন্তে রিপোর্টে সংশ্লিষ্ট ঠিকাদারের ত্রুটি পাওয়া গেছে। এব্যাপারে রেলের নিয়মানুযায়ী তার বিরুদ্ধে ৮ লক্ষ টাকা জরিমানা কর হয়েছে।
বর্ধমান ষ্টেশনের একাংশ ভেঙে পড়ায় দায়ী ঠিকাদারই, জরিমানা ৮ লক্ষ টাকা
  • Title : বর্ধমান ষ্টেশনের একাংশ ভেঙে পড়ায় দায়ী ঠিকাদারই, জরিমানা ৮ লক্ষ টাকা
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  • Date : March 04, 2020
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26 comments:

  1. বাকি সময় কি করেন, আপনার...।
    দুর্ঘটনার পর আপনাদের ঘুম ভাঙ্গে...?
    জয় ভারত।

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  2. रेलवे आरक्षण कागज का दुरूपयोग

    https://youtu.be/kZkLpDxVryE

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  3. रेलवे की व्यवस्थाओं पर तमाचा...
    https://youtu.be/tmi4mKLEEUk

    https://youtu.be/39IOhJkCbRM

    https://youtu.be/_ejkCdcSZ58

    https://youtu.be/JwwMfzBtcHA

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  4. बर्द्धमान जंक्सन की गंदगी से रेल यात्री को हो रही है, परेशानी...

    👎🏿👎🏿👎🏿बर्द्धमान जंक्सन का भीतरी भाग हो या बाहरी भाग, चारों ओर कुड़ा-कचरा फैला हुआ है।
    👉👉👉प्लेटफॉर्म संख्या-१ के बाहर गंदगी का इतना अंबार है कि धूल-मिट्टी उड़ते ही रहती है। साथ में कुड़ा-कचरा जहां-तहां फ्लेटफॉर्म के बाहर पड़ा ही रहता है।
    🤔प्लेटफॉर्म संख्या-१ और २ अपेक्षाकृत साफ ही रहता है, किंतु प्लेटफॉर्म संख्या-३ से लेकर ८ तक प्लेटफॉर्म और पटरियों पर कुड़ा-कचरा सदा फैला ही रहता है।
    🙏🙏🙏क्या रेलवे हमें बताने का कष्ट करेंगे कि किसी भी रेलवे स्टेशन को एक दिन में कितनी बार और किस-किस समय साफ़ करने की व्यवस्था है...?
    🤔🤔🤔क्योंकि बर्द्धमान जंक्सन की अवस्था देखकर नहीं लगता कि इसके प्रत्येक भागों को नियमित साफ किया जाता है...।
    👉👉हम बर्द्धमान जंक्सन और अन्य रेल स्टेशनों से आना जाना करते रहते हैं। यात्रियों को जवाब देना होगा कि यह स्टेशन इतना गंदा क्यों है...? व्यक्तिगत का बहाना बनाकर आप उचित कार्रवाई से भाग नहीं सकते...।
    🤨एक कदम स्वच्छता की ओर...।
    🇮🇳जय हिन्द।

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  5. रेल अवरोध समस्याओं का समाधान नहीं,रेल की अवनति है...
    ✍️भारतीय रेल जो हमेशा घाटे पर चल रही है...। उसमें किसी न किसी बहाने कभी पार्टी के चमचे,कभी राजनीतिक दल,कभी धार्मिक दल,कभी अन्य आदि अपनी-अपनी समस्याओं या स्वार्थों के लिए हर पल कहीं न कहीं रेल का चक्का जाम हो रहा है।
    👎🏿जब रेल आर्थिक वजह या अन्य कारण से अपनी सेवाएं सुचारू रूप से संचालित नहीं कर पाता तो फिर उस कारण या असुविधा के लिए रेल में तोड़फोड़, आगजनी, यात्रियों पर पथराव आदि करने को उतावले रहते हैं...।
    👉सबको रेल में नौकरी चाहिए।
    👉👉सबको रेल में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध चाहिए...।
    👉👉👉सबको विभिन्न प्रकार के छूट चाहिए...।
    👉👉👉👉सबको रेल सेवा चाहिए...।
    👥सबको रेल में क्रय-विक्रय करने का मौका चाहिए...।
    🤳सबको रेलवे की सेवाएं कम से कम शुल्क पर चाहिए...।
    😤घर का सारा काम करने के रूपये है, किंतु टिकट के लिए रूपये कम पड़ जाने वाले बेटिकट यात्रियों को बेटिकट यात्रा चाहिए...।
    🤔🤔🤔कब-तक रेल फालतू का बोझ अपने कंधों पर लेकर चलता रहेगा...। जो लोग रत्तीभर रेल के विकास में योगदान नहीं दे रहे हैं। रेल उसकी चिंता क्यों करें...?
    👤👤रेलवे में अनाधिकृत प्रवेश और अनाधिकृत अवैध अधिकार ही रेलवे के घाटे का सबसे बड़ा कारण है।
    😍इसमें राजनीतिक और धार्मिक दलों का मुख्य हाथ है...।
    🙏🙏🙏कृपया उन्नतिशील और कारगार तरीके अपनाएं। घुसपैठियों को बाहर करें,जिनका रेल में कोई योगदान नहीं है...।
    🗣️रेलवे जमीनों का भी उचित व्यवस्था करें...। रेलवे जमीनों पर कब्जा कर लोग अवैध तरीके से कमाई कर रहें हैं।
    🗣️🗣️खाली पड़े रेलवे क्वाटरों का भी विकल्प व्यवस्था करें। इसे रेलवे के कर्मचारी ही अवैध वसूली कर भाड़े में चलाते हैं...।
    ✊उचित व्यवस्था से ही उन्नतशील रेल का सफर दूर तक जाएगा...।


    https://www.facebook.com/groups/246402829073844/permalink/1001870500193736/?app=fbl

    https://www.facebook.com/100002970311488/posts/2501923283249991/?app=fbl

    https://www.facebook.com/groups/283956009091650/permalink/572427383577843/?app=fbl

    https://www.facebook.com/groups/246402829073844/permalink/1002491156798337/?app=fbl

    https://www.facebook.com/groups/loveubihar/permalink/2698525290227188/?app=fbl

    https://www.facebook.com/groups/215212295514960/permalink/999894887046693/?app=fbl

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  6. बर्द्धमान जंक्सन की अधुरी व्यवस्था...

    ✍️जिस तरह शुक्रवार को प्लेटफॉर्म संख्या 4 और 5 के नये पैदल पुल पर चढ़ने और उतरने के क्रम में कुछ यात्री दबकर घायल हुए। यह बहुत ही शर्मनाक है।
    🤔यह दुर्घटना अव्यवस्थाओं और अधुरी सुविधाओं की तरफ एक संकेत है।
    👉👉बर्द्धमान जंक्सन के मध्य में तीन पैदल पुल है, किंतु यह तीनों पुल इतना पास-पास है कि सारी भीड़ को मजबूरन एक जगह एकत्र होना पड़ता है। स्टेशन के एकदम सामने और एकदम पीछे कोई पैदल पुल की उचित व्यवस्था नहीं है। भीड़ के हिसाब से प्लेटफॉर्मों की चोड़ाई कम है। पैदल पुल की सीढ़ियों की भी चौड़ाई बहुत कम है।
    👎🏿👎🏿👎🏿स्वचालित सीढ़ियों से सिर्फ रेलवे की रूपये की बर्वादी हुई है। यह सीढ़ियां भीड़ को नियंत्रित करने में मददगार नहीं है।
    👎🏿👎🏼👎🏿स्टेशन के अंदर अवैध हॉकरों की अत्यधिक भीड़ और स्थानीय लोगों की प्लेटफॉर्मों पर अड्डेबाजी स्टेशन के भीड़ को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है।
    👎🏼👎🏼👎🏼बहुत सारे यात्रिगण पैदल पुल पर या सीढ़ियों पर ही जरूरत से ज्यादा आवागमन के मार्ग पर चहलकदमी कर या बैठकर यातायात व्यवस्था में रूकावट पैदा करते हैं।
    👥स्टेशन के अंदर और बाहर इतना अतिक्रमण बढ़ गया है कि यात्रियों को प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है।
    🗣️सब मिलाकर सारांश में यह ही कहा जा सकता है कि बर्द्धमान जंक्सन की व्यावस्था सिर्फ काम चलाऊ है।
    🙏🙏कृपया रेलवे के अधिकारियों और कर्मचारियों को उचित सेवा प्रदान करने के लिए उचित मार्गदर्शन करें...।
    जय हिन्द।

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  7. नीची प्लेटफॉर्म को ऊँचा करें...

    ✍️भारत के छोटे-बड़े स्टेशनों को मैं प्राय: ३० वर्षों से देख रहा हूँ। इसमें कुछ खास बदलाव देखने को नहीं मिला।
    👥हम बर्द्धमान से कुन्दर हॉल्ट आना-जाना करते हैं। बर्द्धमान से जाते समय हमलोग जमुई तक टिकट कटाते हैं और हमलोग जमुई से दो स्टेशन आगे कुन्दर हॉल्ट में उतरते हैं। यहाँ पर प्लेटफॉर्म बहुत नीचा होने के कारण यात्रियों को जल्दी उतरने-चढ़ने में परेशानी होती है। खासकर बच्चे,बुढ़े को बहुत परेशानी होती है।
    👤👤कुन्दर हॉल्ट से बर्द्धमान जाने के कारण में एक तो यहां पर टिकट की उचित व्यवस्था नहीं है। हमें यहाँ से पहले जमुई या गिद्धौर या झाझा जाकर टिकट कटाना पड़ता है फिर किसी अन्य सवारी गाड़ी से बर्द्धमान जाना पड़ता हैं।
    🙏🙏🙏कृपया तालित, कुंदर हॉल्ट, गिद्धौर आदि जैसे सम्पूर्ण भारत के नीचा प्लेटफॉर्म वाले छोटे-बड़े स्टेशनों को अतिशीघ्र ऊँचा करने का कष्ट करें...।
    जय हिन्द।

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  8. रेलवे में पुलिस की अवैध वसूली...

    ✍️इस वीडियो में जिस तरह रेलवे पुलिस रेल के डिब्बे में अवैध वसूली करती दिख रही है। यह बहुत ही शर्मनाक है।
    🤔 इस तरह की अवैध वसूली मैं बचपन से ही देखते आ रहा हूँ...। लगभग ३० वर्षों में भी इस तरह की अव्यवस्थाओं पर कोई कार्रवाई नहीं होना, रेलवे में व्याप्त व्यापक भ्रष्टाचार को सूचित करता है।
    👎🏿👎🏿ये रेलवे के वर्दीधारी भिखारियों का दल है।
    👉👉जब हम यात्री ऐसे भिखारियों को बीच चौराहे पीटना शुरू कर दें,तो मत कहना कि तुमने कानून हाथ में क्यों लिया...?
    🙏🙏कृपया,ऐसे भिखारियों को पदस्थ करें...।
    https://www.facebook.com/DeepakKandwal01/videos/410922972944702/?app=fbl

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  9. रेलवे पटरियों के पास अवैध कब्जा, नशाखोरी, बिजली चोरी...

    ✍️बर्द्धमान-बलगोना रेल मार्ग पर प्राया: लोग कट कर मर रहे हैं। कारण रेलवे पटरियों पर अवैध कब्जा, अड्डेबाजी, नशाखोरी आदि...।
    👉👉विजयराम, कुड़ा पाड़ा के पास रेल टनेल के नीचे हमेशा लोफर रास्ते पर बैठ कर अड्डेबाजी, नशाखोरी करते हैं। जिस वजह से आम लोगों को मजबूरन रेल पटरी को पार करके उस पार जाना पड़ता है।
    👎🏿👎🏿टनेल के बगल में ही रेल पटरियों के दो कदम के फासले पर ये लोफर यहां पर एक मंदिर का रूप धीरे-धीरे दे रहे हैं।
    👎🏿👎🏿👎🏿वैसे तो टनेल के नीचे और ऊपर हमेशा इनका अड्डेबाजी नशाखोरी आदि चलता ही रहता है।
    यह मंदिर धीरे-धीरे जैसे-जैसे बड़ा होगा रेल पटरियों के पास लोफरो का जमावड़ा भी बढ़ेगा... और दुर्घटनाएं भी बढ़ेगी...।
    🙏🙏रेल प्रशासन से अनुरोध है कि इस गतिविधियों को जितना जल्दी हो सके, रोकने का प्रयास करें तथा अवैध अतिक्रमण को हटाने का प्रयास करें...।
    जय हिन्द।
    https://youtu.be/tmi4mKLEEUk

    https://youtu.be/39IOhJkCbRM

    https://youtu.be/_ejkCdcSZ58

    https://youtu.be/JwwMfzBtcHA

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  10. ट्रेन में ध्रुमपान...

    ✍️शियालदह जाने की दत्तपुकुर लोकल में सुबह 7.30 बजे वामनगाछी स्टेशन से चढ़ने वाला यह(फोटो वाला) व्यक्ति खुलेआम ट्रेन में ध्रुमपान कर रहा है।
    🙏🙏रेलवे प्रशासन से सविनय निवेदन है कि ऐसे यात्रियों पर उचित कार्रवाई करें...।
    धन्यवाद।
    जय हिन्द।
    https://www.facebook.com/groups/burdwantown/permalink/2426014184151000/?app=fbl

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  11. रेलवे पुलिस की अवैध वसूली...

    https://www.facebook.com/zegotmedia/videos/493442107827081/?app=fbl

    ✍️ऐसे रेलवे पुलिस के द्वारा इस तरह भीक्षावृति से रेलवे को नुक्सान पहुंचाया जा रहा है।
    🙏🙏ऐसे भिखारियों को नौकरी में रखने से रेलवे को कोई लाभ नहीं होगा...। ऐसे पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई होनी चाहिए...।
    जय हिन्द।

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  12. "बर्द्धमान जंक्शन की बेहाल सड़कें"
    बर्द्धमान जंक्शन पर ५ सालों से बन रहे नये निर्माणाधीन पुल के चारों तरफ की यातायात व्यवस्था बहुत ही खराब है। कोई भी ऐसा सड़क नहीं है जो उबड़-खाबड़, टूटा-फूटा या गड्ढे न हो...। हर सड़क दुघर्टनाओं से युक्त है।
    हम कब तक जान हथेली पर लेकर चले...?
    सड़कों पर जरूरत से ज्यादा धूल-मिट्टी के कण मौजूद हैं। गंदगी का तो चारों तरफ अंबार लगा हुआ है। पैदल चलने वाले यात्रियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर अल्पदृष्टि या चश्मे का इस्तेमाल करने वाले लोगों को बहुत परेशान हो रही है।
    एक यात्री
    वंदे मातरम्।

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  13. अतिक्रमण का खेल कब तक...?
    पश्चिम बंगाल के बाजे प्रतापपुर सुभाष पल्ली माठ पाड़ा बर्द्धमान-७१३१०१ में रेलवे और सरकारी जमीनों पर सालों-साल से अवैध घरों, दुकानों का निर्माण जारी है। सरकारों की उदासीनता और स्थानीय चमचों की घुसखोरी से अब ये मिट्टी के मकान कई मंजिलें पक्के मकानों में बदल रहे हैं। इसी तरह खुलेआम नियम-कानूनों को ताक पर रख कर अतिक्रमण होता रहा तो बर्द्धमान निर्माणाधीन पुल ( बर्द्धमान जंक्शन के ऊपर रोड ब्रिज)..., जो लगभग पाँच सालों से निर्माणाधीन है..., कि तरह भारत के शहरों का विकास में कभी भी प्रगति नहीं होने देगी...।
    इस तरह के अतिक्रमण की वजह से ट्रेफिक जाम, बाढ़, बिजली चोरी, अवैध शराब की दुकानों में वृद्धि, महिला असुरक्षा, चोरी-ठगी, गाली-गलौज आदि असमाजिकता उत्पन्न हो रही है।
    जिस वजह से ईमानदार कर्त्तव्यनिष्ठ नागरिकों के आबालवृद्धों को आदर्श परिवेश नहीं मिल रहा है। कुछ तो इन असमाजिक तत्वों से बचने के लिए सदा पैतृक घर-द्वार बेचकर यहाँ-वहाँ पलायन करते रहते हैं। इस तरह कब तक आम नागरिकों के अधिकारों का हनन होता रहेगा...?
    एक आम नागरिक
    वंदे मातरम्।

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  14. सार्वजनिक स्थानों का अवैध इस्तेमाल कब तक...?
    ✍️बर्द्धमान जंक्शन स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-१ के बाहर हमेशा
    प्रतिदिन हजारों यात्रियों का आवागमन होता है। यह बहुत ही भीड़-भाड़ वाला इलाका है।
    इस स्थान पर कोई न कोई छोटा-बड़ा अनुष्ठान होते रहता है। कुछ दिनों से यहाँ इफ्तार पार्टी के लिए विशाल पंडाल का कार्य चल रहा है। जिससे आवागमन बाधित हो रहा है और एक सप्ताह तक यही स्थिति रहनी वाली है।
    🙏पूर्व बर्द्धमान में बहुत से खाली इलाके हैं। जहां इस तरह का आयोजन बिना यातायात व्यवस्था को रूकावट डाले किया जा सकता है।
    बहुत से सरकारी या गैरसरकारी विभाग है। जहां पर छोटे-बड़े अनुष्ठान के लिए परिषद् या होटल किराये पर दिया जाता है।
    👎इतनी सुविधाएं होने के बावजूद भी लचर प्रशासनिक व्यवस्था की वजह से सार्वजनिक स्थानों का खूब अतिक्रमण कर के नीजी कार्य होने लगे हैं।
    यातायात व्यवस्था को इस तरह ब्लॉक करके आम यात्रियों को परेशानी में डालना गलत व्यवस्था की निशानी है।
    जय हिन्द।

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  15. बर्द्धमान स्टेशन अवैध कब्जा

    https://www.facebook.com/100003567099967/posts/1164044297057796/?app=fbl
    अधिकारी का आगमन और त्रुति(दूकाने) गायब...
    (बर्द्धमान पश्चिम बंगाल)
    ✍ भारत के पूर्वी रेलवे का बर्द्धमान जंक्सन की जांच पड़ताल केलिए, जब भी कोई अधिकारी आनेवाले होते हैं,ठीक उसके पहले वहां स्थित अवैध दूकानें आदि हटा लिये जाते हैं।अर्थात गलतियों कमियों त्रुतियों को छुपाने की कोशिश की जाती है।और उनके चले जानेके बाद फिर से वे दूकानें आदि बस जाते हैं...।
    ✍ सवाल उठता है कि नीचले रेलवे अधिकारी क्या करते हैं कि फिर से त्रुतियाँ दृष्टिगोचल होने लगती हैं...।
    ✍अगर ये रेलवे अधिकारी व्यवस्था को ठीक नहीं कर सकते तो जब ऊंचे अधिकारी रेलवे की उन्नति को जांचने के लिए आते हैं तो सारी व्यवस्था कैसी ठीक हो जाती है...?
    ✍ रेलवे स्टेशन और इसके होने वाली अव्यवस्था निम्न है...
    १. दैनिक यात्रियों की दादागीरी
    २.अवैध हॉकरों की भीड
    ३. अवैध पार्किंग
    ४. किन्नरों की अवैध वसूली
    ५.स्टॉलों में काम करने वालों की अवैध भीड
    ६.स्टेशनोंके आस-पास रहने वालों की अवैध भीड
    ✍इन अव्यवस्था से
    १.रेल यात्रियों की समानों की चोरियाँ कभी नहीं रूकती...।
    २. यात्री यात्रा के वक्त सहमें हुए महसूस करते हैं...।
    वंदे मातरम्।


    https://www.facebook.com/100003567099967/posts/1164827170312842/?app=fbl

    जांच अधिकारी के चले जाने की बाद की स्थिति
    (बर्द्धमान पश्चिम बंगाल)
    ✍ भारत के पूर्वी रेलवे का बर्द्धमान जंक्सन की जांच पडताल केलिए, जब भी कोई अधिकारी आनेवाले होते हैं,ठीक उसके पहले वहां स्थित अवैध दूकानें आदि हटा लिये जाते हैं।अर्थात गलतियों कमियों त्रुतियों को छुपाने की कोशिश की जाती है।और उनके चले जानेके बाद फिर से वे दूकानें आदि बस जाते हैं...।
    ✍ सवाल उठता है कि नीचले रेलवे अधिकारी क्या करते हैं कि फिर से त्रुतियाँ दृष्टिगोचल होने लगती हैं...।
    ✍अगर ये रेलवे अधिकारी व्यवस्था को ठीक नहीं कर सकते तो जब ऊंचे अधिकारी रेलवे की उन्नति को जांचने के लिए आते हैं तो सारी व्यवस्था कैसी ठीक हो जाती है...?
    ✍ रेलवे स्टेशन और इसके होने वाली अव्यवस्था निम्न है...
    १. दैनिक यात्रियों की दादागीरी
    २.अवैध हॉकरों की भीड़
    ३.अवैध पार्किंग
    ४. किन्नरों की अवैध वसूली
    ५.स्टॉलों में काम करने वालों की अवैध भीड़
    ६.स्टेशनोंके आस-पास रहने वालों की अवैध भीड़
    ✍इन अव्यवस्था से
    १. रेल यात्रियों की समानों की चोरियाँ कभी नहीं रूकती...।
    २. यात्री यात्रा के वक्त सहमें हुए महसूस करते हैं...।
    वंदे मातरम्।

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  16. हावड़ा स्टेशन के आसपास की गंदगी...

    ✍️हावड़ा जंक्शन सम्पूर्ण भारत में एक अति महत्वपूर्ण स्टेशन है। इसे कोलकाता का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है। लाखों-लाखों स्वदेशी और विदेशी नागरिकों का प्रत्येक दिन आवागमन होता है।
    🌿इतना महत्वपूर्ण जंक्शन होने के बावजूद भी मुझे दुःख के साथ कहना पड़ रहा है कि रेल प्रशासन की उदासीनता की वजह से हावड़ा स्टेशन के चारों ओर गंदगी फैल रही है।
    🌱हावड़ा से बाहर शहरों की तरफ जाने वाली भूमिगत रास्तों पर एक तो जरूरत से ज्यादा अवैध कब्जा है। विक्रेता जहाँ-तहाँ रास्ता अवरूद्ध करके विभिन्न प्रकार के दुकान खोलकर दुकानदारी कर रहे है। वहीं दूसरी ओर भूमिगत रास्तों की दीवारें हद से ज्यादा गंदा है। इस तरह बेपरवाह यात्रियों की वजह से देश और रेलवे का अति महत्वपूर्ण स्टेशन गंदगी की भेंट चढ़ रहा है। यह रेलवे की स्थायी और अस्थायी कर्मचारीगण के लिए शर्म की बात है कि जिस रेलवे की वजह से उनका अपना घर प्रकाशित हो रहा है। उनकी आजीविका चल रही है। वे कर्मचारीगण और अधिकारीगण रेलवे परिसरों को १००% स्वच्छ रखने में असमर्थ है।
    ✍️कर्त्तव्यनिष्ठ रेलवे यात्रियों को स्वच्छ परिवेश देने में सक्षम नहीं है।
    😤बचपन से इस स्टेशन को देखते और समझते आ रहा हूँ। बस इतना कहना चाहूंगा कि इसका जितना बेहतर विकास होना चाहिए था। उतना नहीं हुआ है।
    🙏 इस स्टेशन के लिए ही नहीं, भारतीय रेलवे की किसी भी स्टेशन को बेहतर और स्वच्छ बनाने के लिए मुझ जैसे आम यात्रियों की जरूरत पड़े तो निसंकोच कहिएगा... निस्वार्थ भाव से रेल सेवा के लिए आगे आऊँगा...।
    🎀स्वच्छ रेल, स्वच्छ देश ही आम यात्रियों की मुस्कान है...।
    🇮🇳 हिंदुस्तान जिंदाबाद। 🇮🇳

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  17. ✍️किसी भी सरकारी विभाग का नीजिकरण नहीं होना चाहिए...
    उसमें बहुत से मूलभूत बदलाव करने चाहिए...।

    🌱कौन कितना अक्षरत: अपने-अपने कर्त्तव्यों का पालन कर रहा है। इसका लिखित हिसाब होना चाहिए...।
    मसलन

    १) सफाई कर्मचारी हैं मगर स्टेशन, गाड़ियाँ गंदा क्यों...?

    २) टीटी है मगर बेटिकट यात्री प्लेटफॉर्म, गाड़ियों में तो चहलकदमी करते ही हैं। साथ ही साथ किन्नर, विभिन्न प्रकार के भिखारी, असहाय लोगों का नीजि घर और दूकान बन गया है।

    ३) रेलवे सुरक्षा बल है,किंतु रेलवे परिसर और गाड़ियों में दैनिक यात्रियों की दबंगई,चोरी,लूट की कमी नहीं है।

    ४) स्टेशन मास्टर है मगर स्थानीय लोग प्लेटफॉर्म पर बैठकर घंटों अड्डा मारते है।

    ५) अस्थाई रेलवे हॉकर्स है, किंतु भोजन में गुणवत्ता नहीं...।
    रेलवे के प्रति उनका कोई निश्चित कर्त्तव्य और मापदंड तय नहीं...।

    ६) रेलवे यात्रियों के लिए रेल परिसर और रेलवे के आसपास बने हैं शौचालय...मगर निश्चित दर से अधिक चार्ज वसूल रहे हैं शौचालय कर्मी। इसे रोकने के लिए कोई व्यवस्था नहीं...।

    ७) रेलवे में नशा का सेवन की बस मनाही है। मगर गाड़ियों और रेलवे के आसपास की रेलवे प्रांगन में नशीली वस्तुएं धड़ल्ले से खुब बिक रही है।

    ८) यहाँ-वहाँ न थूके बड़े प्रमुखता से करोड़ों रुपए खर्च कर के लिखे जाते हैं। मगर थूकने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं...।

    ९) रेलवे की संपत्तियाँ यहाँ-वहाँ सड़ रहे हैं। मगर पुनर्निर्माण की सही समय पर कोई व्यवस्था नहीं...।

    १०) रेलवे में हर विभाग के लिए अधिकारी। मगर
    रेलवे की जमीनों, क्वार्टरों, बिजली-पानी का अवैध इस्तेमाल करने वालो पर कोई कार्रवाई नहीं...।
    आदि आदि...।

    🙏🙏मैं कोई रेलवे कर्मचारी नहीं हूँ। एक आम नागरिक हूँ। समय-समय पर शुल्क सहित इसका इस्तेमाल करता हूँ। इसके प्रति हमारी भी जवाबदेही है। इसलिए इसका अभूतपूर्ण उन्नति के बारे में सोचता हूँ, किंतु रेलवे का नीजिकरण नहीं होना चाहिए।

    जय हिन्द जय भारत।

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  18. रेलवे स्टॉलों पर लिखित मूल्य से अधिक की वसूली...

    ✍️बर्द्धमान स्टेशन(पश्चिम बंगाल) के अंदर और स्टेशन के नजदीक के आस-पास के स्टॉलों पर मिलने वाले वस्तुओं के लिखित मूल्य से अधिक की वसूली दुकानदार कर रहे हैं।
    👎अगर किसी वस्तु का मूल्य ₹ १० है तो उसका दाम ₹ १५ ले रहे हैं।
    😤अगर किसी वस्तु का मूल्य ₹३५ है तो उसका दाम ₹ ४० लिया जा रहा है।
    आदि आदि...।
    ✍️विभिन्न वस्तुओं पर अंकित लिखित मूल्य से अधिक वसूली करने से रेलवे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
    🙏कृपया भारतीय रेलवे परिसर को भ्रष्टाचार से मुक्त करें।
    🙏उचित मूल्य पर वस्तुएं खरीदना रेलवे यात्रियों का अधिकार है।
    जय हिन्द जय भारत।

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  19. रेलवे संपत्तियां का गलत इस्तेमाल...

    ✍️बचपन में जब विद्यालय या ट्यूशन पढ़ने जाता था। तब बहुत से बच्चे रेलवे के कर्मचारियों द्वारा लिखने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कॉपियाँ(रजिस्टर) को लेकर आते थे और वे बच्चे उसी पर लिखते थे। बचपन में मुझे भी इस तरह की कॉपियों पर लिखने का मन होता था। इसलिए मैं उन बच्चों से पूछता था कि वे इस तरह की कॉपियाँ किस दुकान से लाते हैं...? सहपाठी कहते थे कि मेरे पापा जहाँ काम करते हैं,वही से लाते हैं।
    बचपन में समझ की कमी की वजह से उनकी बातें समझ के बाहर थी। किंतु हम समझ में आया कि रेलवे के विभिन्न विभागों में उपयोग किये जाने वाले कॉपियों को रेलवे के स्थायी और अस्थायी कर्मचारी नीजि उपयोग के लिए अवैध रूप से घर लेकर चले आते हैं।
    ✍️अभी तो यह भी देखने में आया कि रेलवे का आरक्षण चार्ट का बंडल भी लोग घर पर रद्दी की तरह उपयोग करने के लिए या कॉपी बनाकर लिखने के लिए घर लेकर चले आते हैं।
    🙏जहाँ एक तरफ रेलवे घाटे पर चल रही है। घाटे को कम करने और बेहतरीन सुविधाएं देने के लिए सरकार इसका नीतिकरण कर रही है। यह नीजिकरण बहुत ही गलत और शर्मनाक है।
    ✍️वही दूसरी तरफ रेलवे से अपनी जीविका चलाने वाले कर्मचारी ही इनकी संपत्तियों को लूट रहे हैैं।
    रेलवे के रद्दी रजिस्टर, कॉपियों, आरक्षण चार्ट आदि का पुनर्निर्माण करके फिर से इसका इस्तेमाल किया जा सकता है तथा रेलवे के खर्च को कम किया जा सकता है।
    साथ ही साथ कागज के लिए पेड़-पौधों की कटाई भी नहीं करनी पड़ेगी। इस तरह उचित और सही प्रबंध ही रेलवे के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है।
    😤 जब बेकार का खर्चा कम होगा तो निश्चित है कि घाटा भी कम होगा या नहीं होगा।
    🙏उचित प्रबंध, गतिशील रेल, निडर यात्रा, सुरक्षित यात्री, फायदेमंद भारतीय रेलवे...।
    🇮🇳 जय भारत।

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  20. रेलवे के डिब्बों में किन्नरों की खुलेआम लूट...

    ✍️मैं रेल की ज्यादातर साधारण डिब्बे में ही अभी तक यात्रा किया हूँ। जैसे:- हावड़ा-मोकमा सवारी, शियालदह-मुजफ्फपुर सवारी, बर्द्धमान-झाझा सवारी आदि-आदि।
    कुछ परिस्थितियों में एक्सप्रेस या सुपर फास्ट गाड़ियों के स्लीपर या साधारण डिब्बे में भी यात्रा किया हूँ। जैसे:- आजाद हिंद एक्सप्रेस, कालका मेल, पूर्वा एक्सप्रेस, लालकिला एक्सप्रेस,दून एक्सप्रेस आदि-आदि।
    😤सवारी गाड़ियों में किन्नरों की खुलेआम दादागिरी थोड़ी बहुत दिख जाती है।
    👎😤किंतु एक्सप्रेस और सुपर फास्ट गाड़ियों में इनकी दादागिरी, अश्लिलता,अशब्दों की बौछार असीमित है।
    ✍️मैं एक अल्प दृष्टि युवक हूँ। नंगी आँखों से स्पष्ट नजर नहीं आता। इसीलिए पावर वाले चश्मे का इस्तेमाल करता हूँ। दाए आँख के चश्मे का पावर ६.५ और बाए आँख के चश्मे का पावर ६ है।
    👎रूपये देने से मना करने पर ये लुटेरे, अपशब्दी, अश्लील झुण्ड हिजड़े कई बार मेरे आँखों के चश्मे को खींच कर ले लेते हैंं। फेंक देते हैं। एक बार तो हद ही हो गई पुणे से हावड़ा आने के क्रम में एक हिजड़ों के झुण्ड ने मेरे लिंग को इतने जोर से दबा दिया कि लगभग एक घंटा तक मैं दर्द से तड़पता रहा...।
    🙏मैं रेल प्रशासन से यह पूछना चाहता हूँ कि रेलवे की किस धारा के तहत इन्हें छूट दी गई है। अगर कोई छूट नहीं है तो ये बेटिकट एक तो किसी भी गाड़ियों में चढ़ कर, रेलवे यात्रियों के लिए असुरक्षा के माहौल को खुलेआम अंजाम देने में क्यों सफल हो रही हैं...?
    🇮🇳सुरक्षित यात्री सुरक्षित यात्रा हमारा अधिकार है।
    🇮🇳जय हिन्द।

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  21. "रेलवे शौचालय की गलत व्यवस्था"

    ✍️भारतीय रेल स्टेशनों में उपलब्ध कुछ शौचालयों में लिखा रहता है:--
    पेसाब- मुफ्त
    शौच- ₹ २
    स्नान- ₹ ५
    ये दरें सिर्फ लिखित रहती है। वास्तव में निम्न दरें लागू की जाती है:--
    👨पुरुष शौचालय ( हर उम्र का,बच्चें भी इसके अंतर्गत)
    पेसाब- ₹ २
    शौच - ₹ ५
    स्नान- ₹ १०
    👩महिला शौचालय
    वयस्क महिला हो या फिर छोटी बच्ची, पेशाब करने के लिए प्रति महीला या बच्ची ₹ ५ वसूला जाता है।
    😤लिखित दरों के बारे में पूछने पर शौचालय कर्मी नाकुर-नुकर करते या फिर कुछ नहीं कहना चाहते...।
    इस तरह की लचर व्यवस्थाओं के से तंग आकर बहुत से यात्री इत्र-तत्र मल-मूत्र त्यागने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इस तरह हमारा परिवेश लचर प्रशासनिक व्यवस्थाओं के कारण गंदा बना रहता है।
    जय हिन्द।

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  22. सार्वजनिक स्थानों का अवैध इस्तेमाल कब तक...?
    ✍️बर्द्धमान जंक्शन स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-१ के बाहर हमेशा
    प्रतिदिन हजारों यात्रियों का आवागमन होता है। यह बहुत ही भीड़-भाड़ वाला इलाका है।
    इस स्थान पर कोई न कोई छोटा-बड़ा अनुष्ठान होते रहता है। कुछ दिनों से यहाँ इफ्तार पार्टी के लिए विशाल पंडाल का कार्य चल रहा है। जिससे आवागमन बाधित हो रहा है और एक सप्ताह तक यही स्थिति रहनी वाली है।
    🙏पूर्व बर्द्धमान में बहुत से खाली इलाके हैं। जहां इस तरह का आयोजन बिना यातायात व्यवस्था को रूकावट डाले किया जा सकता है।
    बहुत से सरकारी या गैरसरकारी विभाग है। जहां पर छोटे-बड़े अनुष्ठान के लिए परिषद् या होटल किराये पर दिया जाता है।
    👎इतनी सुविधाएं होने के बावजूद भी लचर प्रशासनिक व्यवस्था की वजह से सार्वजनिक स्थानों का खूब अतिक्रमण कर के नीजी कार्य होने लगे हैं।
    यातायात व्यवस्था को इस तरह ब्लॉक करके आम यात्रियों को परेशानी में डालना गलत व्यवस्था की निशानी है।
    जय हिन्द।

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  23. "दैनिक यात्रियों की दबंगई"
    पुर्व रेलवे का शियादह, हावड़ा बर्द्धमान, आसनसोल आदि स्टेशनों से यात्रा आरंभ करने वालीं रेलगाड़ियों में दैनिक यात्रियों की बर्बरता,अश्लिलता, अपशब्दों, दादागिरी का शिकार आम यात्रियों को होना पड़ रहा है। कहीं पर बैठे हुए यात्रियों को जबरन उठा रहे हैं। कहीं पर दक्कमुक्की कर उन्हें उठाया जा रहा है। कहीं पर डिब्बे की सीटों पर जमकर तासबाजी खेल रहे हैं तो कहीं पर सोकर, पैर पसार कर यात्रा कर रहे हैं। लगता है दैनिक यात्री रेलवे को बपौती समझ लिया है। रेलवे प्रशासन दैनिक यात्रियों की अनुशासनहीनता और दबंगई पर चुप क्यों हैं...?

    रेलवे सार्वजनिक संपत्ति है। इस पर सबका समान अधिकार होना चाहिए। जय हिन्द।
    एक आम यात्री

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  24. "तालित रेल स्टेशन में सुविधाओं की कमी"
    भारत के पूर्वी रेलवे का तालित स्टेशन में एक ही पैदल पुल है जो डाउन साइड से आने वाले यात्रियों के लिए तो ठीक है, किंतु अप साइड से आने वाले यात्रियों के लिए कोई काम का नहीं है, क्योंकि यह पैदल पुल १ नंबर प्लेटफॉर्म के बाहरी हिस्से से प्लेटफॉर्म नंबर ४ तक ही सीमित है। प्लेटफार्म ४ से बाहर जाने के लिए यात्रियों को रेलवे पटरियों को पार करके जाना होता है। यह स्थिति और भयावाह हो जाती है जब अप साइड में दो मालगाड़ियाँ एक साथ खड़ी रहती है। ये मालगाड़ियाँ दिन पर खड़ी रहती है अन्यथा एक जाती है तो दूसरा आकर खड़ी हो जाती है। तब यात्रियों के पास दोनों मालगाड़ियों के नीचे से जान हथेली पर लेकर पार होने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
    एक यात्री
    जय भारत।

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  25. "बर्द्धमान जंक्शन के आसपास अवैध कब्जा और गंदगी..."
    बर्द्धमान स्टेशन के भीतर,बाहर और चारों तरफ अवैध हाकरों, लोगों, दुकानों आदि की उपस्थिति की वजह से स्टेशन के गलियारें हमेशा जाम रहती है।
    बहुत से लोग तो स्टेशन प्रागंन को ही अपना घर बना लिया है। सालों-साल से यहाँ डेरा डाल रखे हैं।
    कुछ स्थानीय लोग प्लेटफॉर्म में अवैध रूप से अड्डबाजी करते रहते हैं। प्लेटफॉर्म संख्या -८ इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है।
    अवैध कब्जे की वजह से रेलवे यात्रियों को अत्यधिक भीड़ का सामना तो करना पड़ रहा है। साथ-साथ असुरक्षित महसूस करना तथा उनके सामानों की चोरी हो जाना आम बात हो गई है।
    अवैध कब्जे की वजह से लोग जहाँ-तहाँ थूक-थूककर, पेशाब कर..., यहाँ तक की गाड़ियों के डिब्बे और स्टेशन में शौचालय कर के गंदा कर रहे हैं। इस वजह से यात्रियों को बहुत ही परेशानी हो रही है।
    एक रेलवे यात्री
    जय भारत।

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  26. "बर्द्धमान जंक्शन की बेहाल सड़कें"
    बर्द्धमान जंक्शन पर ५ सालों से बन रहे नये निर्माणाधीन पुल के चारों तरफ की यातायात व्यवस्था बहुत ही खराब है। कोई भी ऐसा सड़क नहीं है जो उबड़-खाबड़, टूटा-फूटा या गड्ढे न हो...। हर सड़क दुघर्टनाओं से युक्त है।
    हम कब तक जान हथेली पर लेकर चले...?
    सड़कों पर जरूरत से ज्यादा धूल-मिट्टी के कण मौजूद हैं। गंदगी का तो चारों तरफ अंबार लगा हुआ है। पैदल चलने वाले यात्रियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। खासकर अल्पदृष्टि या चश्मे का इस्तेमाल करने वाले लोगों को बहुत परेशान हो रही है।
    एक यात्री
    वंदे मातरम्।

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